कार्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध सागौन कटान का मामला, तीन आरोपियों ने किया आत्मसमर्पण

रामनगर: कार्बेट टाइगर रिजर्व के बिजरानी वन क्षेत्र में सागौन के पेड़ों के अवैध पातन के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से फरार चल रहे तीन आरोपियों ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद 20 अगस्त 2026 को रामनगर न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने बताया कि 28 मार्च 2025 को बिजरानी वन क्षेत्र के फूलताल ब्लॉक, आमडंडा पुरानी बीट की नई प्रस्तावित बीट के कक्ष संख्या-03 में राष्ट्रीय राजमार्ग-309 के समीप सागौन के पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया था। इस संबंध में बिजरानी रेंज में वन अपराध संख्या 06/बिजरानी/2024-25 दर्ज किया गया था।
मामले की जांच उप प्रभागीय वनाधिकारी बिजरानी बिंदर पाल कर रहे हैं। विवेचना के दौरान फरहाद खां, सुलेमान, समीर, सलमान, उमेर खान, युनुस और यासीन की संलिप्तता सामने आई। सभी आरोपी रामपुर क्षेत्र के बताए गए हैं। इनमें फरहाद खां को 28 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
वहीं, जांच में सहयोग नहीं करने पर अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी कराए गए। इसी कार्रवाई के तहत सुलेमान को 16 जून 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत
उमेर खान समेत अन्य आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। कार्बेट टाइगर रिजर्व की ओर से न्यायालय में दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखा गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद 20 अगस्त को समीर, सलमान और उमेर खान ने रामनगर न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जहां से तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
वन अपराध पर सख्त कार्रवाई जारी
उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने कहा कि वन एवं वन्यजीव अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध कटान समेत अन्य वन अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
इस मामले में उप प्रभागीय वनाधिकारी एवं जांच अधिकारी बिंदर पाल, वन क्षेत्राधिकारी बिजरानी नवीन चंद्र पांडे, अधिवक्ता तरुण सिंह बिष्ट, कोर्ट सेल प्रभारी पीएन जोशी, वन दरोगा और वन आरक्षी प्रमोद सत्यावली ने पैरवी और कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




