चंपावत में पूर्व महिला ग्राम प्रधान से बदसलूकी मामले में बड़ा फैसला, 10 दोषियों को 5-5 साल की सजा

चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले में अनुसूचित जनजाति वर्ग की पूर्व महिला ग्राम प्रधान को जूतों की माला पहनाकर अपमानित करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष सत्र न्यायालय (SC-ST कोर्ट) ने 5 महिलाओं समेत सभी 10 दोषियों को पांच-पांच साल के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता को कुल 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि देने का भी आदेश दिया है।
मामला बनबसा क्षेत्र के एक गांव का है और घटना 10 जुलाई 2024 की बताई गई है। बाढ़ और आपदा के बाद प्रशासन की ओर से राहत सामग्री वितरण के दौरान तत्कालीन ग्राम प्रधान को सहयोग के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि मौके पर पहुंचने से पहले कुछ ग्रामीणों के उकसावे पर आरोपियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की। इस दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जूतों की माला पहना दी गई थी।
पीड़िता की शिकायत पर बनबसा थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद 21 अगस्त 2026 को विशेष सत्र न्यायाधीश/जिला जज अनुज कुमार संगल की अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया।
इन 10 आरोपियों को मिली सजा
दोषियों में हेमा खड़ायत, लीला दिगारी, जानकी कलौनी, दिनेश कलौनी, रोहित जेम्स, पिंकी जेम्स उर्फ सारिका, निखिल जेम्स उर्फ अमन, संजीव सिंह, निर्मला दिगारी और संदीप लॉरेंस शामिल हैं। सभी आरोपी गुदमी, बनबसा, चंपावत के निवासी बताए गए हैं।
SC-ST एक्ट की धाराओं में सजा
अदालत ने SC-ST एक्ट की धारा 3(1)(D) के तहत प्रत्येक दोषी को पांच वर्ष के साधारण कारावास के साथ 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा 3(1)(M), 3(1)(R) और 3(1)(S) के तहत प्रत्येक धारा में दो-दो वर्ष का साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा BNS की विभिन्न धाराओं के तहत भी अर्थदंड लगाया गया है।
पीड़िता को मिलेगी 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि
अदालत ने पीड़िता को कुल दो लाख रुपये की प्रतिकर राशि देने का आदेश दिया है। इसमें दोषियों से वसूले गए जुर्माने में से एक लाख रुपये पीड़िता के बैंक खाते में दिए जाएंगे। वहीं राज्य सरकार की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंपावत के माध्यम से एक लाख रुपये की अतिरिक्त प्रतिकर राशि दी जाएगी।
अदालत के इस फैसले को अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला के साथ हुए अपमानजनक व्यवहार के मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई माना जा रहा है।




