केदारनाथ रावल द्वारा उत्तराधिकारी घोषित करने पर मंदिर समिति सख्त, 10 दिन में मांगा जवाब

केदारनाथ । बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा अपने शिष्य को भावी रावल घोषित किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। समिति ने इस पर स्पष्टीकरण मांगते हुए रावल को 10 दिनों के भीतर जवाब देने का नोटिस जारी किया है।
मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि रावल भीमाशंकर लिंग ने अब तक अपने पद से त्यागपत्र देने की कोई औपचारिक सूचना न तो मंदिर समिति को दी है और न ही नियंत्रण विभाग को। ऐसे में जब तक उनका लिखित त्यागपत्र प्राप्त नहीं होता, तब तक पद को रिक्त नहीं माना जाएगा।
समिति ने यह भी पूछा है कि महाराष्ट्र के नांदेड में आयोजित पट्टाभिषेक रजत महोत्सव के दौरान उन्होंने अपने शिष्य को भावी रावल कैसे घोषित कर दिया, जबकि समिति को भेजे गए पत्र में केवल विश्व शांति महायज्ञ और पट्टाभिषेक रजत महोत्सव आयोजित करने की जानकारी दी गई थी।
नियुक्ति का अधिकार समिति के पास
समिति द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939 (संशोधित) की धारा 14 और 15 के अनुसार रावल और नायब रावल की नियुक्ति, नियंत्रण तथा आवश्यकतानुसार दंड या पद से हटाने का अधिकार भी मंदिर समिति के पास है। बिना समिति की अनुमति अपने शिष्य को उत्तराधिकारी घोषित करना स्थापित परंपराओं और नियमों के विरुद्ध है।
मंदिर समिति के सीईओ विजय थपलियाल ने रावल से 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि मामले में आगे निर्णय लिया जा सके।
रावल ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग ने समिति के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि परंपरा के अनुसार रूप छड़ी को नांदेड ले जाया गया और इसके लिए बीकेटीसी की लिखित अनुमति भी ली गई थी।
उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार ही उत्तराधिकारी का चयन किया गया है। आगे की प्रक्रिया मंदिर समिति को ही पूरी करनी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में भी उन्हें गुरु परंपरा के तहत ही इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।




