उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन, प्रदेश में शोक की लहर

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रदेशभर में शोक की लहर दौड़ गई। पिछले कई दिनों से उनके आवास पर राजनेताओं और परिजनों का आना-जाना लगा हुआ था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनरल खंडूड़ी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि खंडूड़ी की सादगी, स्पष्टवादिता और कार्यकुशलता हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगी। उनका निधन न केवल उत्तराखंड बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है।
अटल बिहारी वाजपेयी के भरोसेमंद नेता
खंडूड़ी को राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है। 1990 के दशक में सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वे सक्रिय राजनीति में आए। वाजपेयी के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती होती थी।
पहली बार लोकसभा पहुंचने के दो वर्ष के भीतर ही उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया गया। हालांकि 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1999 में केंद्र में बनी वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। इस कार्यकाल में देश में राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क अवसंरचना के विकास को नई गति मिली, जिसके लिए उनकी आज भी सराहना की जाती है।
दो बार संभाली उत्तराखंड की कमान
साल 2007 में उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। 2007 से 2009 तक उन्होंने प्रदेश की कमान संभाली। इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के चलते नेतृत्व परिवर्तन हुआ।
साल 2011 में भ्रष्टाचार के मुद्दों के बीच केंद्रीय नेतृत्व ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और सख्त कार्यशैली को लेकर उनकी अलग पहचान बनी।
2014 में केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत सरकार बनने के बाद उन्हें रक्षा मामलों की संसदीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
भुवन चंद्र खंडूड़ी का राजनीतिक और प्रशासनिक योगदान उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक याद किया जाएगा।



