उत्तराखण्ड

उत्तराखंड UCC: वसीयत पंजीकरण के लिए अब मिलेगा 90 दिन का समय, शासन ने शुरू की संशोधन प्रक्रिया

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत वसीयत पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार वसीयत पंजीकरण के लिए निर्धारित 15 दिनों की समय-सीमा को बढ़ाकर 90 दिन करने जा रही है। इस संबंध में शासन स्तर पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

 

गृह सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यूसीसी के प्रभावी क्रियान्वयन और आम नागरिकों को हो रही व्यावहारिक परेशानियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में यह पाया गया कि वर्तमान में वसीयत पंजीकरण के लिए निर्धारित 15 दिनों की अवधि कई मामलों में पर्याप्त नहीं है, जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

 

दस्तावेज जुटाने में आ रही थी परेशानी

 

वर्तमान व्यवस्था के तहत वसीयत पंजीकरण के लिए पहचान पत्र, संपत्ति स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, गवाहों के रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने होते हैं। इसके अलावा कानूनी सलाह लेने और वसीयत का ड्राफ्ट तैयार कराने में भी समय लगता है। ऐसे में 15 दिन की समय-सीमा कई लोगों के लिए अपर्याप्त साबित हो रही थी।

 

इन्हीं समस्याओं को देखते हुए शासन ने समय-सीमा बढ़ाकर 90 दिन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए विधिक संशोधन का प्रारूप तैयार कर न्याय विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

 

उत्तराधिकार कानूनों के विरोधाभास भी होंगे दूर

 

बैठक में यूसीसी के उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों और उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम (जेड-ए एक्ट) की कुछ धाराओं के बीच उत्पन्न विधिक विरोधाभासों पर भी चर्चा हुई। इन मुद्दों के समाधान के लिए राजस्व विभाग के साथ मिलकर एक समेकित प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

 

विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती ने इस संबंध में पुष्टि करते हुए कहा कि समय-सीमा बढ़ाने और आवश्यक संशोधनों की प्रक्रिया पर कार्य किया जा रहा है।

 

प्रमुख चुनौतियां

 

वसीयत पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने में अधिक समय लगना।

 

कानूनी परामर्श और वसीयत का ड्राफ्ट तैयार कराने में देरी।

 

उत्तराधिकार कानूनों और जेड-ए एक्ट के बीच कानूनी असंगतियां।

 

विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता।

 

 

क्या है UCC?

 

समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू किया गया है। इसका उद्देश्य धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर समान नियमों के आधार पर न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

 

उत्तराखंड में UCC 27 जनवरी 2025 को आधिकारिक रूप से लागू किया गया था। आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। वहीं, गुजरात और असम में भी यूसीसी लागू करने की दिशा में तैयारी जारी है।

 

समय-सीमा बढ़ाने के इस प्रस्ताव से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है और वसीयत पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक एवं सुगम हो सकेगी।

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