प्रभारी EO की तैनाती पर बेरोजगार संघ का हल्ला बोल, कहा – नियमों की अनदेखी कर युवाओं का हक मारा

देहरादून : शहरी विकास विभाग में प्रभारी अधिशासी अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड में नया विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को उत्तराखंड बेरोजगार संघ के कार्यकर्ता शहरी विकास निदेशालय के बाहर जमा हुए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
संघ का आरोप है कि नगर निकायों में EO के खाली पदों पर नियमित भर्ती करने के बजाय विभाग ने क्लर्क, सफाई निरीक्षक और कर निरीक्षक जैसे कर्मचारियों को प्रभारी EO बना दिया। इससे योग्य युवाओं के रोजगार के अवसर छिन गए हैं।
15 लाख लेकर पोस्टिंग का आरोप
बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल ने इस दौरान शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रभारी EO की तैनाती के लिए 15-15 लाख रुपये लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है बल्कि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला है। राम कंडवाल ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार को आरोप गलत लगते हैं तो जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी।
प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नियुक्ति आदेशों को तुरंत रद्द करने की मांग की। राम कंडवाल ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज होगा। अगली रणनीति के तहत प्रदेशभर के युवा बैग लेकर देहरादून आएंगे और मंत्री आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
क्या है मामला
शहरी विकास निदेशालय ने हाल ही में आदेश जारी कर विभिन्न नगर निगम, पालिका और पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों को प्रभारी EO की जिम्मेदारी सौंपी थी। विभाग के पास कुल 60 EO के पद स्वीकृत हैं। इनमें से कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। विभाग ने अस्थायी व्यवस्था के नाम पर यह नियुक्तियां की हैं।
नियमावली को लेकर सवाल
स्थानीय निकाय केंद्रीयकृत सेवा नियमावली-2016 के हवाले से संगठनों का कहना है कि EO पद पर नियुक्ति वरिष्ठता या लोक सेवा आयोग के जरिए होनी चाहिए। क्लर्क या सफाई निरीक्षक को सीधे प्रभारी EO बनाना नियमों के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने भी जताई थी चिंता
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2025 में नैनीताल हाईकोर्ट ने नगर निकायों में EO की कमी पर सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने चार महीने में ठोस कदम उठाने को कहा था। बेरोजगार संघ का कहना है कि कोर्ट के आदेश का हवाला देकर सरकार ने भर्ती के बजाय जुगाड़ से काम चलाने की कोशिश की।
सरकार से तीन मांगें
1. विवादित आदेश तुरंत वापस लिया जाए
2. EO के रिक्त पदों पर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो
3. आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए
अभी तक शहरी विकास विभाग या मंत्री राम सिंह कैड़ा की तरफ से इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में और गरमा सकता है।




