इलाज के दौरान कैदी की मौत, परिजनों ने पुलिस और प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप

देहरादून: सुद्धोवाला जिला जेल में बंद 29 वर्षीय कैदी दिलदार की दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है। वहीं, मृतक के परिजनों ने विकासनगर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए बेटे की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही पोस्टमार्टम में हुई देरी को लेकर भी नाराजगी जताई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
11 जुलाई को हुई थी गिरफ्तारी
परिजनों के अनुसार, विकासनगर पुलिस ने 11 जुलाई को दिलदार को 8.8 ग्राम स्मैक बरामद होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अगले दिन उसे न्यायालय में पेश कर सुद्धोवाला जिला जेल भेज दिया गया। परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी, जिसके कारण वे पूरी रात बेटे की तलाश करते रहे। उनका कहना है कि अगले दिन थाने पहुंचने पर भी उन्हें दिलदार से मिलने नहीं दिया गया।
अस्पताल प्रशासन ने बताई मौत की वजह
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. आर.एस. बिष्ट ने बताया कि दिलदार को 16 जुलाई को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय वह बेहोश था। इलाज के दौरान गुरुवार देर रात करीब 1:40 बजे उसकी मौत हो गई।
डॉ. बिष्ट के अनुसार, मृतक लंबे समय से अनियंत्रित थायराइड की बीमारी से पीड़ित था। इसी वजह से उसे वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और बाद में कार्डियक फिब्रिलेशन हुआ, जिससे कार्डियक फेलियर के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
पिता बोले- बेटे ने कहा था, मेरे पास कोई ड्रग्स नहीं था
मृतक के पिता का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद बेटे से हुई बातचीत में उसने खुद को बेगुनाह बताया था। उनके अनुसार, दिलदार ने कहा था कि उसके पास कोई मादक पदार्थ नहीं था और पुलिस ने उस पर झूठा आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि पुलिस द्वारा दिखाई गई बरामदगी से दिलदार का कोई संबंध नहीं था।
जेल में बिगड़ी तबीयत, कई दिन चला इलाज
परिजनों के मुताबिक, जेल भेजे जाने के दो दिन बाद 14 जुलाई को दिलदार की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर 16 जुलाई को दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया।
परिवार का कहना है कि 16 से 22 जुलाई तक वह बोलने की स्थिति में नहीं था। 23 जुलाई को उसने अपनी मां से इशारों में कुछ देर बात की और उसी रात उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम में देरी का भी आरोप
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि रात में मौत के बाद शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया, लेकिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हुई। उनका कहना है कि वे सुबह करीब 7 बजे से शाम लगभग 4 बजे तक मोर्चरी के बाहर शव मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन इस दौरान कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी से लेकर इलाज और मौत की सूचना तक उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।




