उत्तराखण्ड

कांवड़ यात्रा 2026: हाथी-गुलदार से सुरक्षा के लिए वन विभाग अलर्ट, स्वास्थ्य विभाग भी तैयार

हरिद्वार: विश्व प्रसिद्ध कांवड़ मेले को लेकर हरिद्वार में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष करीब पांच करोड़ कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य संबंधित विभागों ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। जंगल से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में हाथी और गुलदार की गतिविधियों को देखते हुए विशेष निगरानी रखी जाएगी, जबकि कांवड़ मार्ग पर 32 अस्थायी अस्पताल स्थापित किए जा रहे हैं।

 

पिछले वर्ष कांवड़ मेले में करीब चार करोड़ श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे थे। इस बार संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन स्वयं तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं। प्रशासन की प्राथमिकता मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है। इसी के तहत शहर में अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज कर दिया गया है। नगर निगम और सिंचाई विभाग की भूमि से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं तथा कांवड़ मार्गों को साफ और सुगम बनाया जा रहा है।

 

वन विभाग ने जगजीतपुर, श्यामपुर और अन्य वन क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित करते हुए वहां विशेष टीमें तैनात करने का निर्णय लिया है। कांवड़ मार्गों के किनारे उगी झाड़ियों की कटाई कराई जा रही है ताकि हाथी, गुलदार और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

 

स्वास्थ्य विभाग ने भी मेले के दौरान आपात चिकित्सा सेवाओं की व्यापक व्यवस्था की है। पूरे कांवड़ मार्ग पर 32 अस्थायी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे, जहां चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध रहेंगी। सांप के काटने पर उपयोग होने वाले एंटी वेनम और कुत्ते के काटने पर लगाए जाने वाले एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा सभी स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें अलर्ट मोड पर रखा गया है।

 

गंगा घाटों पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहेंगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वाटर एंबुलेंस का भी संचालन किया जाएगा।

 

इस बीच प्रशासन ने कांवड़ मेले के दौरान कुंभ मेले से जुड़े नए निर्माण कार्यों और कांवड़ मार्ग पर चल रहे विकास कार्यों को फिलहाल रोक दिया है, ताकि यात्रा में किसी प्रकार की बाधा न आए। कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद इन कार्यों को दोबारा शुरू किया जाएगा।

 

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें चौबीसों घंटे गश्त करेंगी और हाथी तथा गुलदार की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।

 

वहीं, सीएमओ डॉ. आर.के. सिंह ने कहा कि मेले के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखा जाएगा और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं।

 

सिटी मजिस्ट्रेट हर गिरी ने बताया कि प्रशासन का लक्ष्य कांवड़ मेले को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुचारु रूप से संपन्न कराना है। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ लगातार कार्य कर रहे हैं और मेला क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने का अभियान जारी है।

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