उत्तराखण्ड

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार की पुलिस सुरक्षा याचिका खारिज की, कोर्ट ने लगाई सख्त फटका

नैनीताल :  उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार की पुलिस सुरक्षा की मांग पर सख्त रुख अपनाया। दीपक कुमार ने अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों से जुड़ी याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने पुलिस से सुरक्षा देने की मांग की थी। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया और सवाल उठाया कि एक आरोपी अपने ही मामले में पुलिस सुरक्षा क्यों मांग सकता है।

कोर्ट की सख्ती और विवाद

कोर्ट की एकलपीठ ने दीपक कुमार को मौखिक रूप से फटकारते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ गंभीर मामले चल रहे हैं, तो विशेष सुरक्षा मांगने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी का सुरक्षा प्राप्त करना उसके अधिकारों का हिस्सा नहीं है, जब तक कि वास्तविक खतरा और स्थिति प्रमाणित न हो।

दीपक कुमार ने अपने तर्क प्रस्तुत करने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि आरोपी द्वारा पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी हिदायत दी कि याचिकाकर्ता अनावश्यक रूप से मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर मामले को लेकर विवादित पोस्ट साझा न करें, ताकि जांच प्रभावित न हो।

मामले का पृष्ठभूमि

दीपक कुमार पर गंभीर आपराधिक आरोप चल रहे हैं। 28 जनवरी को उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ दुर्व्यवहार, मोबाइल फोन छीनने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

वायरल वीडियो में दीपक कुमार ने विवाद के समय खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों का ध्यान खींचा। दीपक के मुताबिक उन्हें कुछ लोग छोटे-छोटे चंदे देने लगे। इसके बाद दीपक ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुकदमा निरस्त करने और पुलिस जांच में सुरक्षा की मांग की थी।

पुलिस प्रशासन और सुरक्षा पर कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि यदि कोई आरोपी अत्यधिक खतरे में महसूस करता है, तो पहले अपने खिलाफ चल रहे मामले का समाधान करे। पुलिस सुरक्षा की मांग करने वाले आरोपी के प्रति इस तरह का रवैया कानूनी दृष्टि से उचित नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन को ऐसी याचिकाओं और मामलों में उचित कार्रवाई करनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मामले की गंभीरता के अनुरूप नियमों का पालन हो।

फैसला और अगली सुनवाई

कोर्ट ने दीपक कुमार की याचिका खारिज कर दी, लेकिन मामले की अगली सुनवाई अभी बाकी है। कानूनी विशेषज्ञ इस मामले को देशभर में चर्चा का विषय मान रहे हैं। अदालत का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में आरोपी की सुरक्षा मांग और पुलिस की जिम्मेदारी के संबंध में मानक तय कर सकता है।

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