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चारधाम यात्रा 2026: बिना ग्रीन कार्ड नहीं चलेगा कोई कॉमर्शियल वाहन, आज से आवेदन हुए शुरू

हरिद्वार। चारधाम यात्रा को लेकर परिवहन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। यात्रा पर जाने वाले कॉमर्शियल वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड सोमवार से जारी किए जाएंगे। हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित आरटीओ कार्यालय में परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ग्रीन कार्ड व्यवस्था का शुभारंभ करेंगे।

तीन स्थानों पर ग्रीन कार्ड केंद्र

यात्रियों और वाहन चालकों की सुविधा के लिए विभाग ने फिलहाल तीन स्थानों , हरिद्वार (रोशनाबाद आरटीओ कार्यालय), ऋषिकेश, नरसन बोर्डर पर ग्रीन कार्ड केंद्र बनाए है।

इन केंद्रों पर वाहनों के दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही ग्रीन कार्ड जारी किया जाएगा।

दस्तावेजों की होगी सख्त जांच

परिवहन विभाग के अनुसार, ग्रीन कार्ड जारी करने से पहले वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट, वैध बीमा, परमिट और चालक के लाइसेंस सहित सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी। बिना ग्रीन कार्ड के किसी भी कॉमर्शियल वाहन को यात्रा मार्ग पर संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है। इस वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की विशेष तैयारियां की हैं।

केदारनाथ मंदिर मार्ग पर बर्फ हटाने की चुनौती

22 अप्रैल से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा को देखते हुए शासन-प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। खराब मौसम के बीच लोक निर्माण विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें पैदल मार्ग से बर्फ हटाने में लगी हुई हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मार्ग को समय से सुचारु करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पर्यटन सीजन में बढ़ेगी गैस की मांग

चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के चलते Dehradun में रसोई गैस की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि की आशंका है। पहले से जारी गैस आपूर्ति दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।

गर्मी शुरू होते ही प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे मौसेरी, ऋषिकेश, सहस्त्रधारा, चकराता में पर्यटकों की आमद तेज हो गई है। होटलों, होम-स्टे और ढाबों में व्यावसायिक और घरेलू गैस सिलेंडरों की मांग बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऋषिकेश और चकराता जैसे क्षेत्रों में यात्रियों के पड़ाव के कारण गैस की खपत सामान्य दिनों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। ऐसे में विभाग और गैस एजेंसियों के लिए अगले दो महीने आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।

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