उत्तराखण्ड

जनगणना ड्यूटी से नहीं मिलेगी आसानी से छुट्टी, मेडिकल बोर्ड की संस्तुति जरूरी

देहरादून: जनगणना के दूसरे चरण के तहत उत्तराखंड में एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक आबादी की गणना की जाएगी। भारत सरकार की ओर से गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद जनगणना कार्य निदेशालय और उत्तराखंड शासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

प्रदेश में निवास कर रही करीब 1.27 करोड़ आबादी की गणना के लिए लगभग 35 हजार कार्मिकों की जरूरत होगी। इसके लिए उत्तराखंड शासन ने जनगणना के संचालन और कार्मिकों की नियुक्ति से संबंधित एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी कर दी है। यह एसओपी जनगणना सचिव दीपक कुमार की ओर से जारी की गई है।

जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि सेंसस एक्ट और उत्तराखंड शासन की ओर से जारी एसओपी के अनुसार कोई भी विभाग जनगणना के लिए स्टाफ देने से मना नहीं कर सकता। यदि कोई विभाग स्टाफ उपलब्ध कराने से इनकार करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को यथासंभव उनके कार्यस्थल के सबसे नजदीकी गणना ब्लॉक में ड्यूटी दी जाएगी। प्राथमिकता के आधार पर ऐसे स्कूलों के शिक्षकों का चयन किया जाएगा, जहां कई शिक्षक कार्यरत हैं, ताकि विद्यालय की सामान्य शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो। वहीं, बीमारी के आधार पर जनगणना ड्यूटी से नाम हटवाने के लिए मेडिकल बोर्ड की संस्तुति जरूरी होगी।

एसओपी के अनुसार सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को स्कूल में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची खंड शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी। सूची में नाम, पदनाम, एंप्लॉई आईडी, मोबाइल नंबर और वर्तमान विद्यालय का पता दर्ज करना होगा। इसके आधार पर कर्मचारियों को निकटतम गणना ब्लॉक आवंटित किया जाएगा।

खंड शिक्षा अधिकारी विद्यालयवार सूचियों को नगर निगम, नगर पालिका परिषद और तहसील जैसे प्रशासनिक क्षेत्रों के अनुसार वर्गीकृत कर संबंधित चार्ज अधिकारी को उपलब्ध कराएंगे। चार्ज अधिकारी जनगणना ड्यूटी के आवंटन को लेकर संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे और Enumerator, Supervisor तथा Reserve के रूप में नियुक्त कर्मचारियों की सूची संबंधित कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे।

एसओपी में एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से मुक्त रखने का प्रावधान किया गया है। वहीं, सुपरवाइजर का फील्ड दायित्व गणना ब्लॉक की सीमा की पहचान करवाने और 20 प्रतिशत डाटा सत्यापन तक सीमित रहेगा। ऐसे में सुपरवाइजर स्तर के शिक्षक अपने नियमित शिक्षण कार्य के साथ जनगणना ड्यूटी का निर्वहन कर सकेंगे।

रिजर्व श्रेणी में नियुक्त शिक्षक-कर्मचारी केवल जनगणना ड्यूटी में नियुक्त होने के आधार पर अपने नियमित शिक्षण कार्य से छूट का दावा नहीं कर सकेंगे। रिजर्व कर्मचारी को जब तक पूरी जनगणना ड्यूटी नहीं दी जाती, तब तक वह अपने नियमित कार्य का भी निर्वहन करेंगे। प्रधानाचार्य रोजाना शिक्षण व्यवस्था और जनगणना ड्यूटी की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार आंतरिक समायोजन करेंगे।

जनगणना के अगले चरण की तैयारियों के लिए सभी सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और सरकारी सहायता प्राप्त प्रतिष्ठानों एवं संस्थानों से कर्मचारियों की सूची प्राप्त की जाएगी। सभी प्रधान जनगणना अधिकारी (PCO) चार्ज स्तर पर कर्मचारियों की सूचियों की समीक्षा करेंगे। निर्धारित सूची उपलब्ध नहीं कराने वाले कार्यालयाध्यक्षों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

चिकित्सीय आधार पर जनगणना ड्यूटी से छूट मांगने वाले कर्मचारियों के मामलों में मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। मेडिकल बोर्ड की संस्तुति के आधार पर ही ऐसे मामलों में निर्णय लिया जाएगा। वहीं, गैर-चिकित्सीय आधार पर छूट मांगने वाले कर्मचारियों को राहत देने से पहले चार्ज अधिकारी को प्रधान जनगणना अधिकारी की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।

किसी कर्मचारी को जनगणना संबंधी प्रशिक्षण दिए जाने के बाद सामान्य परिस्थितियों में ड्यूटी से छूट नहीं दी जाएगी। केवल विशेष आपात स्थिति में ही प्रशिक्षण के बाद ड्यूटी से छूट देने पर विचार किया जा सकेगा।

जिलाधिकारी एवं प्रधान जनगणना अधिकारी जनगणना के इस महत्वपूर्ण, समयबद्ध और राष्ट्रीय महत्व के कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यकता के अनुसार जिले के सभी राजकीय विभागों, प्रतिष्ठानों, संस्थानों और जिला स्तरीय अधिकारियों की सहायता ले सकेंगे। वहीं, तहसील और विकासखंड स्तर के सभी कार्यालयों की ओर से चार्ज अधिकारियों को जनगणना कार्य और कार्मिकों की ड्यूटी लगाने में पूरा सहयोग दिया जाएगा।

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