उत्तराखण्ड

नगरासू गुरुद्वारा और कर्णप्रयाग विवाद पर सियासत तेज, भाकपा (माले) ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने मांगी निष्पक्ष जांच

देहरादून/गैरसैंण: रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में चार दिनों तक डटे रहे निहंग मंगलवार को वहां से चले गए, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई राजनीतिक और सामाजिक सवाल खड़े कर दिए हैं। भाकपा (माले) उत्तराखंड के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने मामले को लेकर बयान जारी करते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं कांग्रेस ने भी कर्णप्रयाग और नगरासू प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।

 

भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय युवाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में सिख पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई क्रॉस एफआईआर उनका कानूनी अधिकार है। हालांकि उन्होंने इस मामले की जांच चमोली पुलिस से हटाकर हरिद्वार स्थानांतरित किए जाने पर सवाल उठाए हैं।

 

मैखुरी ने कहा कि यदि जांच जिले से बाहर स्थानांतरित करनी थी तो निकटवर्ती रुद्रप्रयाग, पौड़ी या टिहरी जिले को भी चुना जा सकता था। ऐसे में हरिद्वार को ही जांच के लिए चुनने के पीछे क्या आधार है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं पुलिस अधिकारियों को उनके पद और जिम्मेदारी के बजाय धर्म और मूल पहचान के आधार पर तो नहीं देखा जा रहा है।

 

नगरासू प्रकरण को लेकर भी उठाए सवाल

 

इंद्रेश मैखुरी ने नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण को कर्णप्रयाग घटना से जोड़ने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन के अनुसार कब्जा करने वालों का पहले गुरुद्वारे के लोगों से विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने ऊपरी मंजिल पर कब्जा कर लिया। ऐसे में दोनों घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करने के आधार स्पष्ट होने चाहिए।

 

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी अन्य समुदाय के लोग किसी धार्मिक स्थल पर इस तरह कब्जा करते, तो क्या पुलिस और प्रशासन का रवैया इतना ही नरम रहता? मैखुरी ने यह आशंका भी जताई कि कहीं यह पूरा घटनाक्रम आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा तो नहीं है।

 

कांग्रेस ने भी मांगी निष्पक्ष कार्रवाई

 

कांग्रेस नेताओं ने भी कर्णप्रयाग और नगरासू मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश नेगी ने कहा कि कुछ तत्व इस मामले को सांप्रदायिक रंग देकर उत्तराखंड और पंजाब के लोगों के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे रोका जाना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति “अतिथि देवो भव:” की भावना पर आधारित है और चारधाम यात्रा के दौरान देशभर से श्रद्धालु यहां आते हैं। ऐसे में सरकार को कानून और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।

 

पेपर लीक मामलों पर भी सरकार को घेरा

 

कांग्रेस ने इस दौरान राज्य में पेपर लीक के मामलों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। चमोली जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश डिमरी ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार हो रही गड़बड़ियों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि भर्ती परीक्षाएं समयबद्ध तरीके से आयोजित की जाएं और पेपर लीक में शामिल माफिया तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

 

पूर्व विधायक जीत राम टम्टा ने कहा कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगार और सुरक्षित भविष्य देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और पूर्व में हुए पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की।

 

मामले पर बनी हुई है नजर

 

नगरासू और कर्णप्रयाग से जुड़े घटनाक्रम के बाद प्रशासन और पुलिस की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है। वहीं राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के चलते यह मामला अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

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