उत्तराखण्ड

अंकिता भंडारी मर्डर केस: दोषियों की जमानत पर फैसला टला, 20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

नैनीताल: चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोषी पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान दोनों दोषियों की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख तय कर दी।

 

दोषियों ने आजीवन कारावास की सजा को दी है चुनौती

 

कोटद्वार की निचली अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में आईपीसी की धारा 302, 354A और 201 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को दोनों दोषियों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए जमानत की मांग की है।

 

बचाव पक्ष ने कहा- अंकिता ने की थी आत्महत्या

 

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि अंकिता भंडारी ने आत्महत्या की थी और हत्या में उनका कोई हाथ नहीं है। बचाव पक्ष ने अदालत से दोनों दोषियों को जमानत पर रिहा करने की मांग की।

 

सरकार और पीड़ित पक्ष ने किया विरोध

 

राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि घटना के बाद रिसॉर्ट के कमरे को बुलडोजर से तोड़ा गया, आगजनी कर सबूत मिटाने की कोशिश की गई और व्हाट्सएप चैट सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ हैं। उनका कहना था कि यदि आरोपियों का घटना से कोई संबंध नहीं था तो सबूत मिटाने की कोशिश क्यों की गई।

 

फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य बने अहम आधार

 

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि घटना के समय आरोपियों की लोकेशन घटनास्थल पर मिली थी। फोरेंसिक जांच और मोबाइल लोकेशन के अलावा अंकिता के व्हाट्सएप चैट भी मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। जांच में यह भी सामने आया था कि घटना से पहले रिसॉर्ट के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे और डीवीआर से छेड़छाड़ की गई थी।

 

क्या है पूरा मामला?

 

पौड़ी गढ़वाल के डोभ श्रीकोट निवासी अंकिता भंडारी वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर शव चीला बैराज में फेंक दिया गया था। पुलिस जांच के बाद रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्या और उसके सहयोगी सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत तीनों को दोषी ठहरा चुकी है और वर्तमान में सभी जेल में बंद हैं।

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