उत्तराखंड में पारंपरिक खेती को बढ़ावा: चमोली के 70 गांवों में बनेंगे कम्युनिटी सीड बैंक

देहरादून | उत्तराखंड में पारंपरिक खेती और बीज संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्राम्य विकास विभाग ने नई पहल शुरू की है। योजना के तहत चमोली जिले के छह ब्लॉकों के 70 गांवों में कम्युनिटी सीड बैंक स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना में 960 परिवारों को चिन्हित किया गया है।
ग्राम्य विकास सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, फसल विविधता को संरक्षित रखना और किसानों की आमदनी बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इससे जलवायु सहनशीलता और खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
पारंपरिक बीज विनिमय व्यवस्था को मिलेगा नया जीवन
सचिव ने बताया कि यह परियोजना उत्तराखंड की पारंपरिक बीज विनिमय व्यवस्था को पुनर्जीवित करेगी। पहले विवाह के समय दुल्हन अपने मायके से बीज और अनाज लेकर आती थी, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में बीजों का आदान-प्रदान होता था और फसलों की उत्पादकता बढ़ती थी। अब इसी परंपरा को कम्युनिटी सीड बैंक के रूप में संगठित ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
इन ब्लॉकों के गांव होंगे शामिल
योजना के तहत चमोली जिले के दशोली, गैरसैंण, नंदानगर, नारायणबगड़, देवाल और कर्णप्रयाग ब्लॉकों के गांव शामिल किए गए हैं। चयनित गांवों में 50 प्रतिशत महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर पहल
यह परियोजना प्रतिष्ठित कंसल्टेंसी कंपनी PwC की विशेष रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाई गई है। रिपोर्ट में इस मॉडल को नवाचारी और वर्षा आधारित कृषि के लिए अनुकूल बताया गया है।




