जल संस्थान में समान काम-समान वेतन के साथ परीक्षा की शर्त, उपनल कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

देहरादून: उत्तराखंड जल संस्थान में उपनल कर्मचारियों को ‘समान काम के लिए समान वेतन’ का लाभ तो मिलेगा, लेकिन इसके साथ विभाग ने एक नई शर्त भी जोड़ दी है। जल संस्थान प्रबंधन ने मंगलवार को आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि संबंधित कर्मचारियों को एक महीने के भीतर अपने पद की योग्यता के अनुरूप विभागीय परीक्षा भी देनी होगी। इस फैसले के बाद कर्मचारियों में असमंजस और नाराजगी का माहौल है।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) डीके सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिस पद पर कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें उसी पद के अनुरूप विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही कर्मचारियों के संबंध में आगे का निर्णय लिया जाएगा।
150 से अधिक उपनल कर्मचारी होंगे प्रभावित
जल संस्थान में उपनल के माध्यम से करीब 150 कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। इनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनो और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। आदेश के अनुसार डाटा एंट्री ऑपरेटर को कंप्यूटर टाइपिंग परीक्षा, जबकि स्टेनो कर्मचारियों को टाइपिंग के साथ शॉर्टहैंड परीक्षा भी देनी होगी। परीक्षा की शर्त सामने आने के बाद सबसे अधिक चिंता स्टेनो कर्मचारियों में देखी जा रही है।
परीक्षा के आधार पर होगा आगे का फैसला
जल संस्थान प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि विभागीय परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही कर्मचारियों के भविष्य को लेकर निर्णय लिया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद अब परीक्षा की शर्त लागू करना उनके लिए मानसिक दबाव पैदा कर रहा है।
यूपीसीएल में भी समान वेतन को मिली मंजूरी
इधर, उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) में भी उपनल कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। मंगलवार को नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए यूपीसीएल बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। इसके अलावा आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों का मानदेय 4,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये करने की भी मंजूरी दी गई है।
कर्मचारी संगठनों ने जताया विरोध
उत्तराखंड जल संस्थान अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने विभागीय परीक्षा की शर्त का विरोध किया है। मोर्चा के मुख्य संयोजक नंदलाल जोशी ने कहा कि कार्मिक विभाग के आदेश में परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं है। उनका कहना है कि 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों से अब परीक्षा लेना मानसिक उत्पीड़न है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वहीं, जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुरूप ही समान वेतन का आदेश जारी किया गया है और नियमों के तहत विभागीय परीक्षा आयोजित की जाएगी।




