मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ऊर्जा बचत पर जोर, उत्तराखंड में 10-15 किमी साइकिल ट्रैक के निर्देश

देहरादून: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर दिखने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा संसाधनों का सीमित उपयोग करने की अपील की है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया जा सके।
पीएम की अपील के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी ऊर्जा संरक्षण को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने ईंधन बचत संबंधी एसओपी जारी की है और सरकारी वाहनों के उपयोग में कटौती के साथ ‘नो व्हीकल डे’ को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वर्क फ्रॉम होम पर जोर
सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाए। जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था अपनाई जाए। हफ्ते में एक दिन ‘No Vehicle Day’ मनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
मैदानी जिलों में 10-15 किमी साइकिल ट्रैक बनाने के निर्देश
प्रमुख सचिव आर के सुधांशु ने 14 मई को ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत के लिए व्यापक कार्ययोजना जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि पर्वतीय जिलों को छोड़कर सभी मैदानी जिलों में कम से कम 10 से 15 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक जल्द विकसित किया जाए।
उनका कहना है कि इससे न केवल लोग साइकिल से सुरक्षित आवागमन कर सकेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
परेड ग्राउंड का साइकिल ट्रैक बदहाल
सरकार के इस फैसले के बीच देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित 600 मीटर लंबे साइकिल ट्रैक की हालत सवाल खड़े कर रही है। ट्रैक पर करीब 22 स्थानों पर दरारें पाई गई हैं, जिससे साइकिल चलाना असुविधाजनक और जोखिम भरा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले से बने ट्रैकों की मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित किए बिना नए ट्रैक बनाने का निर्णय व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।
वैज्ञानिक भी बता रहे फायदेमंद
विशेषज्ञों के अनुसार ऊर्जा संसाधनों का सीमित उपयोग न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जरूरी कदम है। ऐसे में साइकिल ट्रैक जैसी पहलें दीर्घकालिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।




