नैनीताल में बाहरी बाइक चालकों से 100 रुपये प्रवेश शुल्क पर बवाल, 8 सभासदों ने बोर्ड भंग करने की मांग उठाई

नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल में बाहरी जिले और राज्यों से आने वाले दोपहिया वाहन चालकों से 100 रुपये प्रवेश शुल्क वसूलने के नगर पालिका के फैसले पर विवाद गहरा गया है। इस निर्णय के विरोध में नगर पालिका परिषद के आठ सभासद खुलकर सामने आ गए हैं। सभासदों ने जिलाधिकारी और कुमाऊं मंडलायुक्त से उत्तराखंड नगर पालिका अधिनियम की धारा-34 के तहत नगर पालिका बोर्ड को भंग करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर वे हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
नगर पालिका सभागार में आयोजित बैठक के दौरान पूर्व पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी ‘मोंटू’, वरिष्ठ सभासद भगवत सिंह रावत, गजाला कमाल, जितेंद्र पांडेय ‘जीनू’, अंकित चंद्रा, रमेश चंद्रा, काजल आर्या समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने पालिका प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सभासदों का कहना है कि बाहरी दोपहिया वाहन चालकों से 100 रुपये प्रवेश शुल्क वसूलने का फैसला जनविरोधी है और इससे पर्यटन नगरी नैनीताल की छवि प्रभावित होगी। उनका कहना है कि यह निर्णय पर्यटकों को हतोत्साहित करेगा और पर्यटन कारोबार पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
विरोध कर रहे सभासदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में कई महत्वपूर्ण फैसले बिना पर्याप्त चर्चा और व्यापक सहमति के लिए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रवेश शुल्क लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और बोर्ड की नियमित बैठकें क्यों नहीं बुलाई जा रही हैं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी निर्णय पारदर्शी तरीके से और बोर्ड की सहमति से लिए जाने चाहिए।
मामले को लेकर नैनीताल विधायक सरिता आर्या ने भी नगर पालिका के फैसले का विरोध किया। भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ गांधी चौक पर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने पालिका प्रशासन का पुतला फूंका और टोल टैक्स संबंधी टेंडर प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कर उसे निरस्त करने की मांग की।
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि जिन सभासदों ने अब विरोध शुरू किया है, उनमें से अधिकांश पहले बोर्ड बैठक में संबंधित प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी दोपहिया वाहनों से प्रवेश शुल्क वसूलने का निर्णय राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अनुरूप लिया गया है। उनके अनुसार, मॉल रोड पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने, शहर में वाहनों की संख्या नियंत्रित करने और पालिका की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।
गौरतलब है कि नगर पालिका बोर्ड के गठन के बाद पालिका की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए टोल शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके तहत कारों के लिए टोल शुल्क बढ़ाने के साथ-साथ बाहरी दोपहिया वाहनों पर भी 100 रुपये प्रवेश शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया था। हाल ही में नया टेंडर आवंटित होने के बाद इस व्यवस्था को लागू किया गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों, अधिवक्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। अब यह मामला प्रशासन और राजनीति दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।




