भरसार विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत के बाद आक्रोश, जांच समिति गठित; छात्रों ने रखीं स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने समेत कई मांगें

पौड़ी गढ़वाल: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार में छात्रा की मौत के मामले को लेकर छात्रों में आक्रोश है। मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने जांच टीम का गठन किया है। वहीं, छात्रों ने कुलसचिव और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने समेत कई मांगें रखीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई मांगों पर विचार करने और समाधान की दिशा में कार्रवाई का भरोसा दिया है।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। छात्रों ने वार्डन और डिस्पेंसरी में तैनात फार्मासिस्ट को हटाने की मांग की। उनका कहना है कि परिसर में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। डिस्पेंसरी में सीमित उपचार व्यवस्था होने के कारण गंभीर रूप से बीमार छात्रों को बाहर के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रा की मौत के बाद विश्वविद्यालय में शोकसभा तक आयोजित नहीं की गई और सामान्य रूप से शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर कार्य जारी रहे। इससे छात्र-छात्राओं में नाराजगी और बढ़ गई। प्रदर्शन के बाद कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने आक्रोशित छात्रों से वार्ता की।
करीब दो घंटे चली बैठक में छात्रों ने मृतक छात्रा के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने समेत कई मांगें विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखीं। छात्रों ने परिसर में 24 घंटे डॉक्टर और नर्स की व्यवस्था करने, आपातकालीन स्थिति के लिए चार एंबुलेंस उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की।
इसके अलावा छात्रों ने स्वास्थ्य केंद्र में पैथोलॉजी लैब स्थापित करने, नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने, मेस की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण कराने, बीमारी के दौरान छात्रों पर उपस्थिति का दबाव नहीं बनाने और छुट्टी लेने की प्रक्रिया को सरल करने की मांग रखी। छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार और मामले में जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी छात्रों ने की।
छात्रों ने कुलसचिव और डीन छात्र अधिष्ठाता के साथ भी विभिन्न मांगों को लेकर वार्ता की। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान कई मांगों पर सहमति बनी है। छात्रों का कहना है कि अब वे प्रशासन की ओर से सहमति के अनुसार कार्रवाई किए जाने का इंतजार करेंगे।
कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने छात्रा की मौत को बेहद दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में एक चिकित्सक की नियुक्ति की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को विशेष रूप से मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छात्रों की समस्याओं को लेकर बैठक की गई है और समाधान की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
कुलपति के मुताबिक, पूरे मामले की जांच के लिए जांच समिति गठित कर दी गई है, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
यह है पूरा मामला
बीती शनिवार रात बीएससी हॉर्टिकल्चर चतुर्थ वर्ष की छात्रा मधु की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। छात्रों के मुताबिक, छात्रा को विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध मेडिकल सुविधा से उपचार दिलाने का प्रयास किया गया, लेकिन आरोप है कि वहां उसे अपेक्षित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। इसके बाद छात्रा को विश्वविद्यालय की एंबुलेंस से पाबौ अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
छात्रों का आरोप है कि पाबौ पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से अपनी एंबुलेंस उपलब्ध कराने से मना कर दिया गया। इसके बाद सरकारी एंबुलेंस की मदद से छात्रा को पौड़ी अस्पताल ले जाया गया। पौड़ी में उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे श्रीनगर रेफर किया गया।
छात्रों के अनुसार, श्रीनगर में भी छात्रा की तबीयत में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद रविवार को उसे ऋषिकेश ले जाया गया। उपचार के दौरान रविवार को छात्रा की मौत हो गई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मामले को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है। घटना के बाद से विश्वविद्यालय के छात्रों में आक्रोश बना हुआ है।



