धराली आपदा के 14 महीने बाद कल्प केदार मंदिर को खोजने के लिए खुदाई शुरू, 25 फीट मलबे में दबा है मंदिर

उत्तरकाशी। धराली में आई विनाशकारी आपदा के करीब एक वर्ष दो महीने बाद ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को खोजने और उसके जीर्णोद्धार के लिए खुदाई शुरू कर दी है। नवरात्रि के पहले दिन रविवार को आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और हवन किया गया। इसके बाद देवता द्वारा निर्धारित समय पर खुदाई का काम शुरू किया गया।
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि फिलहाल देवता के आदेश के बाद ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से खुदाई शुरू की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की है। जल्द ही समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।
समिति के सदस्यों के अनुसार, इतिहास में चौथी बार कल्प केदार मंदिर को खोजने के लिए खुदाई की जा रही है। इससे पहले वर्ष 1926 में खुदाई के दौरान मंदिर के मुख्य हिस्से को जमीन के नीचे से बाहर निकाला गया था। पिछले वर्ष अगस्त में धराली में आई आपदा के दौरान मंदिर करीब 25 फीट मलबे के नीचे दब गया था।
कल्प केदार मंदिर समिति के सदस्य संजय पंवार ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार, वर्ष 1803 में आई आपदा के दौरान बाढ़ में कल्प केदार मंदिर बह गया था। उस समय यहां करीब 204 मंदिरों का समूह था। इसके बाद वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई दिए थे। वर्ष 1926 में आई आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर आधा दब गया था, जबकि अन्य छोटे मंदिर बह गए थे। उस समय ग्रामीणों ने खुदाई कर मुख्य मंदिर को बाहर निकाला था।
करीब एक सदी बाद पिछले वर्ष अगस्त में आई आपदा ने मंदिर को फिर मलबे में दबा दिया। अब नवरात्रि के पहले दिन ग्रामीणों ने समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में मंदिर को खोजने की कवायद शुरू कर दी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि खुदाई के बाद प्राचीन मंदिर को फिर से सामने लाकर उसके जीर्णोद्धार का रास्ता साफ होगा।




