एमबीबीएस दाखिले के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क बड़ा, विदेशों तक कनेक्शन की जांच

देहरादून: एमबीबीएस दाखिले के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच आगे बढ़ने के साथ उसका नेटवर्क भी बड़ा सामने आ रहा है। पुलिस की अब तक की पड़ताल में गिरोह का संचालन संगठित तरीके से किए जाने के संकेत मिले हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह में शामिल सदस्यों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं और प्रत्येक सदस्य को एक विशेष जिम्मेदारी दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का एक हिस्सा एमबीबीएस में दाखिले के इच्छुक अभ्यर्थियों की तलाश करता था। इसके बाद अभ्यर्थियों की सामाजिक या आरक्षित श्रेणी के अनुरूप दस्तावेज जुटाने और कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने की व्यवस्था की जाती थी। गिरोह के कुछ सदस्य दाखिले की प्रक्रिया संभालते थे।
विदेशों में मेडिकल दाखिले का भी दावा
पुलिस की जांच में गिरोह की पहुंच उत्तराखंड और देश के अन्य हिस्सों के अलावा मध्य एशिया के कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान तक होने का दावा किए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के साथ पुलिस अब गिरोह के संपर्कों, लेनदेन और उन अभ्यर्थियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिनसे दाखिले के नाम पर रकम ली गई। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल संपर्क, दस्तावेजों और संभावित पीड़ितों से जुड़ी जानकारी को जोड़कर नेटवर्क की अगली कड़ियां तलाश रही है।
पहले तलाशे जाते थे ‘ग्राहक’, फिर तैयार होती थी योजना
पुलिस के अनुसार, गिरोह का एक हिस्सा ऐसे अभ्यर्थियों और उनके स्वजन से संपर्क करता था, जो नीट में अपेक्षित परिणाम नहीं आने या मनचाहे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिलने के कारण दाखिले का रास्ता तलाश रहे थे।
ऐसे अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रक्रिया से अलग आसान तरीके से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया जाता था। अभ्यर्थी की जरूरत और श्रेणी की जानकारी लेने के बाद गिरोह के अन्य सदस्य सक्रिय होते थे।
श्रेणी का लाभ दिलाने के लिए दस्तावेजों का खेल
जांच में फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का पहलू भी सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ऐसे प्रमाणपत्र कहां और किसके माध्यम से तैयार कराए जाते थे। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान सामने आई विसंगतियों को भी जांच का आधार बनाया जा रहा है।
यदि यह कड़ी जांच में पुष्ट होती है तो मामला केवल अभ्यर्थियों से रकम लेने तक सीमित न रहकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल कराने वाले लोगों तक भी पहुंच सकता है।
दाखिले की ‘डील’ से कॉलेज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी
पुलिस के अनुसार, गिरोह में कुछ सदस्यों की भूमिका अभ्यर्थियों और उनके स्वजन से सौदा तय करने की थी, जबकि अन्य सदस्य दाखिले की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर सक्रिय रहते थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रकम किस स्तर पर तय होती थी, किस माध्यम से ली जाती थी और बाद में किन-किन लोगों तक पहुंचती थी।
बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की पड़ताल भी इसी कड़ी में की जा रही है। पुलिस की जांच में सामने आई भूमिकाओं से संकेत मिल रहे हैं कि गिरफ्तार आरोपित पूरे नेटवर्क का केवल एक हिस्सा हो सकते हैं। अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद अभ्यर्थी जुटाने, प्रमाणपत्र तैयार कराने, रकम के लेनदेन और दाखिले की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है।
विदेशों तक कनेक्शन ने बढ़ाई जांच की परिधि
विदेशी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के नाम पर संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा राज्य और देश से बाहर तक पहुंच गया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि किन संस्थानों के नाम का इस्तेमाल किया गया, अभ्यर्थियों को वास्तव में कहीं प्रवेश दिलाया गया या केवल झांसा दिया गया।
इसके साथ ही विदेश भेजने के लिए उपलब्ध कराए गए दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें भी हेराफेरी की गई थी, इसकी भी जांच की जा रही है।




