बारिश को लेकर उत्तराखंड में हाई अलर्ट, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में 24 घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के दौरान लगातार हो रही बारिश ने सरकारी मशीनरी की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग की ओर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किए जाने के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर पर्वतीय जिलों में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।
लगातार बारिश के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क बंद होने, जलभराव और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
इन जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने फिलहाल कई जिलों को ऑरेंज और येलो अलर्ट की श्रेणी में रखा है। देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर के लिए येलो अलर्ट है। इन जिलों में मौसम की लगातार निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में बढ़ाई निगरानी
पर्वतीय जिलों में पहले से भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है। मौसम अलर्ट के बाद इन इलाकों में अतिरिक्त एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
सड़क मार्गों पर जेसीबी और अन्य जरूरी मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही राहत और बचाव दल को जरूरत पड़ने पर तत्काल सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।
चारधाम और कांवड़ यात्रा को लेकर भी अलर्ट
भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा को लेकर भी प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए जिलों को आपात स्थिति में यात्रियों के ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने और मौसम सामान्य होने के बाद ही आगे भेजने की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
जिलों को उपलब्ध कराया जा रहा बजट
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर देहरादून और हिमाचल से सटे क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए विशेष निगरानी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों से आपदा प्रबंधन के लिए प्राप्त मांग के आधार पर बजट जारी किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव की तैयारियों में संसाधनों की कमी न हो।
बादल फटने का पूर्वानुमान नहीं, लेकिन तैयारियां पूरी
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक फिलहाल मौसम विभाग की ओर से बादल फटने जैसी किसी विशेष घटना का पूर्वानुमान नहीं दिया गया है। हालांकि कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर पहाड़ी राज्य में नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
ऐसे में प्रशासन की नजर सिर्फ बारिश पर नहीं, बल्कि उन सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर है जहां तेज बारिश के बाद भूस्खलन, सड़क बंद होने या नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। चारधाम और कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर भी अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है।




