अग्निवीर योजना को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, गोदियाल-प्रतीम-हरक ने उठाए सवाल

देहरादून: अग्निवीर योजना को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए योजना में बदलाव और युवाओं के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने पत्रकार वार्ता में अग्निवीर भर्ती से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए।
गणेश गोदियाल ने कहा कि अग्निवीर योजना के तहत युवाओं की सैन्य सेवा चार वर्ष तक सीमित है। उन्होंने सवाल उठाया कि 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती होने वाले युवाओं के सामने चार वर्ष बाद रोजगार और भविष्य की क्या व्यवस्था होगी। उन्होंने स्थायी सैनिकों और अग्निवीरों के बीच सेवा अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अंतर को लेकर भी सवाल किए।
प्रीतम सिंह ने कहा कि सैन्य सेवा की उत्तराखंड में विशेष भूमिका रही है और प्रदेश के बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होते हैं। उन्होंने अग्निवीरों के चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सेवा पूरी करने वाले 75 प्रतिशत युवाओं के लिए आगे क्या अवसर होंगे।
डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि केवल सरकारी विभागों में आरक्षण या प्राथमिकता की बात पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि अब तक कितने अग्निवीरों को स्थायी सरकारी रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सेना भर्ती का युवाओं के रोजगार से गहरा संबंध है और भर्ती व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने नियमित और पारदर्शी सैन्य भर्ती, रिक्त पदों को भरने, उत्तराखंड के लिए विशेष भर्ती नीति और पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए ठोस पैकेज की मांग रखी। कांग्रेस की ओर से कर्नल राम रतन नेगी ने भी अग्निवीर योजना के तहत स्थायी नियुक्तियों की संख्या और सेवा के बाद युवाओं के लिए रोजगार, उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका विरोध सेना या सैनिकों के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था और अग्निवीरों के भविष्य से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। उन्होंने सरकार से अग्निवीरों के लिए सेवा समाप्ति के बाद रोजगार, शिक्षा, प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।




