उत्तराखण्ड

लक्सर बस स्टैंड पर महाराजा भागीरथ की पेंटिंग हटाने पर हंगामा, विधायक उमेश कुमार ने जताई नाराजगी

लक्सर: हरिद्वार जिले के लक्सर बस स्टैंड पर महाराजा भागीरथ की पेंटिंग हटाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामले की जानकारी मिलते ही खानपुर विधायक उमेश कुमार मौके पर पहुंचे और पेंटिंग हटाने के तरीके पर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी भी दी। वहीं, सैनी समाज के जिलाध्यक्ष बाबूराम सैनी का कहना है कि पेंटिंग खंडित हो गई थी, इसलिए समाज के लोगों ने आपसी सहमति से उसे हटाकर वहां महाराजा भागीरथ की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया।

जानकारी के अनुसार, करीब दो साल पहले खानपुर विधायक उमेश कुमार शर्मा ने अपने निजी खर्च से महाराजा भागीरथ की फ्रेम पेंटिंग बनवाई थी। सैनी समाज की मांग पर विधायक ने अपनी पत्नी सोनिया शर्मा के हाथों विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ इसका अनावरण कराया था। इसके बाद से पेंटिंग लक्सर बस स्टैंड पर लगी हुई थी।

15 अक्टूबर को पेंटिंग हटाए जाने की सूचना मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोगों ने इसकी जानकारी विधायक उमेश कुमार को दी, जिसके बाद वह बस स्टैंड पहुंचे। वहां पेंटिंग एक कोने में रखी देख उन्होंने मौके पर मौजूद ठेकेदार और मजदूरों के प्रति नाराजगी जताई।

विधायक ने धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात कही

विधायक उमेश कुमार ने कहा कि महाराजा भागीरथ लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। उन्होंने गंगा को धरती पर लाकर जनकल्याण का कार्य किया था। ऐसे में पेंटिंग को हटाने से पहले समाज के लोगों को सूचना दी जानी चाहिए थी और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जानी चाहिए थी।

विधायक ने मौके से अधिकारियों को फोन कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने धार्मिक भावनाएं आहत करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी। उनके हस्तक्षेप के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया।

सैनी समाज के जिलाध्यक्ष ने बताई पेंटिंग हटाने की वजह

वहीं, सैनी समाज के जिलाध्यक्ष बाबूराम सैनी ने कहा कि इस मामले को लेकर काफी समय से समाज के लोगों के साथ बातचीत चल रही थी। उनके अनुसार, महाराजा भागीरथ की पेंटिंग खंडित हो गई थी। इसके बाद समाज के लोगों ने चंदा एकत्र कर आपसी सहमति से पेंटिंग हटाकर वहां महाराजा भागीरथ की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया।

बाबूराम सैनी के मुताबिक, 15 अक्टूबर को खंडित पेंटिंग हटाकर वहां प्रतिमा स्थापित की गई है। बाद में विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।

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