उत्तराखण्ड

पिथौरागढ़ में बार-बार क्यों आ रहे भूकंप? वैज्ञानिकों ने खोजा जमीन के भीतर छिपा बड़ा कारण

देहरादून। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और धारचूला क्षेत्र में बार-बार आने वाले भूकंपों के पीछे की भूगर्भीय गतिविधियों को समझने में वैज्ञानिकों को अहम सफलता मिली है। हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) के वैज्ञानिकों के अध्ययन में पूर्वी कुमाऊं हिमालय के भूगर्भ में मौजूद विद्युत चालक क्षेत्रों और तरल पदार्थों की भूमिका सामने आई है। यह अध्ययन Tectonophysics जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

वैज्ञानिकों ने पीलीभीत से पिथौरागढ़ होते हुए तिब्बत सीमा तक करीब 210 किलोमीटर लंबे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना का अध्ययन मैग्नेटोटेल्यूरिक तकनीक से किया। यह तकनीक प्राकृतिक विद्युत-चुंबकीय संकेतों के आधार पर धरती के भीतर अलग-अलग गहराइयों पर मौजूद चट्टानों और अन्य भूगर्भीय संरचनाओं की विद्युत प्रतिरोधकता का अध्ययन करती है।

अध्ययन के मुताबिक भारतीय प्लेट के हिमालयी क्षेत्र में नीचे की ओर धंसने और प्लेटों के आपसी टकराव से चट्टानों पर अत्यधिक दबाव बनता है। इस प्रक्रिया के दौरान चट्टानों से निकलने वाले तरल पदार्थ भूगर्भ में कमजोर और अधिक चालक क्षेत्रों का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में दाब और चट्टानों की मजबूती में बदलाव भूकंप उत्पन्न होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। CSIR-NGRI के शोध में भी गहरे तरल पदार्थों से जुड़े चालक क्षेत्रों और भूकंपीय गतिविधि के बीच संबंध पर जोर दिया गया है।

पिथौरागढ़ क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों की दृष्टि से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में आता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यहां की भूगर्भीय संरचना और भारतीय प्लेट की निरंतर गति को समझना भूकंप के कारणों तथा संभावित जोखिमों के आकलन के लिए महत्वपूर्ण है।

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने मैग्नेटोटेल्यूरिक डेटा के जरिए पूर्वी कुमाऊं हिमालय की भू-पर्पटी की विद्युत संरचना का विश्लेषण किया है। अध्ययन में अजय मांगलिक, पवन कुमार, एस. त्यागराजन, एम. डेमुडु बाबू, एन.एन. चक्रवर्ती और एम. सुरेश समेत वैज्ञानिक शामिल रहे।

वैज्ञानिकों का यह अध्ययन हिमालयी क्षेत्र में भूकंप आने की भूगर्भीय प्रक्रिया को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस तरह के अध्ययन भूकंप के कारणों और संभावित तंत्र को समझने में मदद करते हैं, लेकिन किसी विशेष समय पर भूकंप आने की सटीक भविष्यवाणी नहीं करते।

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