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कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, राजभवन कूच

देहरादून में हालिया हत्याओं के विरोध में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, गणेश गोदियाल ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

देहरादून

राजधानी देहरादून में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और हाल के दिनों में हुई जघन्य हत्याओं के विरोध में कांग्रेस ने बड़ा शक्ति प्रदर्शन करते हुए राजभवन कूच किया। परेड मैदान से शुरू हुए इस प्रदर्शन में हजारों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध राज्य की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं और आमजन में भय का माहौल बन गया है।
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने आरोप लगाया कि बीते लगभग पंद्रह दिनों में राजधानी में पांच जघन्य हत्याएं हुईं, जबकि कई मामलों में अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत ने कहा कि “देवभूमि” की पहचान वाले राज्य में दिन-दहाड़े होने वाली वारदातें कानून-व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाती हैं।
प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने किया। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कानून-व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस चरणबद्ध और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

विपक्ष का नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश
कांग्रेस इस मुद्दे को केवल अपराध तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे सरकार की “प्रशासनिक विफलता” के रूप में पेश कर रही है। लगातार विरोध-प्रदर्शन से पार्टी जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुखर विपक्ष की भूमिका निभा रही है।

महिलाओं की सुरक्षा को राजनीतिक केंद्र बनाना

महिला कांग्रेस की सक्रिय भागीदारी से साफ है कि पार्टी महिलाओं की सुरक्षा को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है। यह रणनीति शहरी और महिला मतदाताओं को संबोधित करने की दिशा में देखी जा रही है।

सत्ता बनाम विपक्ष – आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति
जहां कांग्रेस राज्य में अपराधों को प्रशासनिक विफलता बता रही है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कानून-व्यवस्था का मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है। ऐसे में इस विषय पर लगातार दबाव सरकार और पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक चुनौती बढ़ा सकता है। अगर अपराध की घटनाएं चुनावी माहौल तक चर्चा में रहती हैं, तो विपक्ष इसे जनसुरक्षा बनाम सरकार की जवाबदेही के बड़े मुद्दे में बदलने की कोशिश करेगा।

राजनीतिक रूप से यह प्रदर्शन सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जनमत बनाने का प्रयास माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस दबाव का जवाब प्रशासनिक कदमों से देती है या यह मुद्दा राजनीतिक टकराव को और तेज करता है।

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