हरिद्वार में हर की पैड़ी पर बोर्ड लगे हैं, जिन पर लिखा है “अहिन्दू प्रवेश निषेध क्षेत्र”। मोटे तौर पर ग़ैर हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र।

हरिद्वार में हर की पैड़ी पर बोर्ड लगे हैं, जिन पर लिखा है “अहिन्दू प्रवेश निषेध क्षेत्र”। मोटे तौर पर ग़ैर हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र।
हजारों बरस से चले आ रहे कुंभ को पहली बार #सांप्रदायिक रंग देने की पृष्ठभूमि तैयार हो गई है। गंगा सभा ने हर की पैड़ी पर ग़ैर हिंदुओं का प्रवेश निषिद्ध करने वाले बोर्ड लगाए है, अगाध श्रद्धा के प्रतीक भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक कुंभ के बहाने सियासत आस्था से खिलवाड़ करने को आतुर है, सरकार, अफ़सर पल्ला झाड़ रहे हैं और गंगा सभा समानांतर व्यवस्था चला रही है। गंगा सभा के अनुसार 108 घाटों पर ग़ैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित होना चाहिए।
सवाल कई हैं लेकिन जवाब कौन दें ?
: ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन से लेकर अन्यत्र स्थानों और रहने वाले उन विदेशी नागरिकों का क्या जो हिंदू नहीं है और गंगा आरती से लेकर #कुंभ तक सभी गतिविधियों में शामिल होते है ?
: उन हज़ारों ग़ैर हिन्दू विदेशी नागरिकों का क्या जो पेशवाई देखने आते है ?
: हरिद्वार के आश्रमों में रहने वाले उन ग़ैर हिंदुओं का क्या जो कुंभ में शामिल होते है ?
: देश में रहने वाले ईसाई, जैन, पारसी, बौद्ध, सिक्ख समुदाय के लोगो का क्या जो गंगा और कुंभ दोनों को मान्यता देते है ?
लेकिन असल दिक्कत केवल मुसलमान से हैं, गोल टोपी लगाये कोई मुसलमान कुंभ में क्षेत्र में न आय !! ताकि गंगा सभा के बहाने सरकार बाद में मुनादी करके इस कुंभ को “हिन्दू कुंभ” का नाम देकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करे।
:- प्रयागराज कुंभ 2025 में कई विदेशी वीआईपी, जिनमें स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स, अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउचिनो, लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविकिएने, स्लोवाकिया के व्लादिमीर बोहाक, और कई देशों के राजदूत (अमेरिका, फ्रांस, रूस, जापान, जर्मनी, आदि) और आध्यात्मिक यात्री शामिल थे, जिन्होंने संगम में डुबकी लगाई और #भारतीय संस्कृति का अनुभव किया, खासकर लॉरेन पॉवेल जॉब्स ने तो आत्मशुद्धि के लिए कल्पवास किया और व्यासनंद गिरी महाराज के राजतिलक में हिस्सा लिया। इनमें से कोई हिंदू नहीं था।




